आइना बनाकर अपने इस दिल में लगा ले मुझको,
मैं तो हूँ तस्वीर तेरी घर में अपने सजा ले मुझको.
इन काली तेज़ आँधियों में रोशन आखिरी चिराग हूँ,
हवाओं से बुझ जाऊंगा अब आकर तू बचा ले मुझको.
दीदारे-हसरत से तेरे आज देखता हूँ मैं घर को तेरे,
कहीं कोई तेरी इस गली से आज न निकाले मुझको.
हाँ,मेरी तो राख भी रहेगी सच में एहसान मंद तेरी,
गर समझकर मेहंदी एक बार हथेली पर रचा ले मुझको.
अकेला उड़ता परिंदा हूँ,नोच देंगे ये दरिन्दे शायद मुझे,
तू अपने इस दामन में आज कही अन्दर छुपा ले मुझको.
उम्र-भर तो इस जहाँ की फ़िक्र में जगा रहा हूँ मैं यहाँ,
अरे कुछ देर तो अपनी बाँहों के दरमियाँ तू सुला ले मुझको.
हर एक बार मैंने ही मनाया है इन रूठे हुए लोगों को यहाँ,
इस आखिरी बार तो आकर तू प्यार से बस मना ले मुझको.
मुद्दत से सोया हुआ हैं अपनी ही तन्हाई के साथ में मंगल,
मैं तो हूँ तस्वीर तेरी घर में अपने सजा ले मुझको.
इन काली तेज़ आँधियों में रोशन आखिरी चिराग हूँ,
हवाओं से बुझ जाऊंगा अब आकर तू बचा ले मुझको.
दीदारे-हसरत से तेरे आज देखता हूँ मैं घर को तेरे,
कहीं कोई तेरी इस गली से आज न निकाले मुझको.
हाँ,मेरी तो राख भी रहेगी सच में एहसान मंद तेरी,
गर समझकर मेहंदी एक बार हथेली पर रचा ले मुझको.
अकेला उड़ता परिंदा हूँ,नोच देंगे ये दरिन्दे शायद मुझे,
तू अपने इस दामन में आज कही अन्दर छुपा ले मुझको.
उम्र-भर तो इस जहाँ की फ़िक्र में जगा रहा हूँ मैं यहाँ,
अरे कुछ देर तो अपनी बाँहों के दरमियाँ तू सुला ले मुझको.
हर एक बार मैंने ही मनाया है इन रूठे हुए लोगों को यहाँ,
इस आखिरी बार तो आकर तू प्यार से बस मना ले मुझको.
मुद्दत से सोया हुआ हैं अपनी ही तन्हाई के साथ में मंगल,
अब तो कोई जरा से प्यार से इस नींद से जगा ले मुझको...
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