देखकर आपकी इस तड़पती कमसिन जवानी को ,
मेरे भी लबो पर मीठा सा पानी आ गया .
जो एक बार दिखाया मैंने आपको कुछ अपना ,
वो एक बार में आपके मन भा गया .
तेरे इन लाल -लाल लबों की रसभरी फांकें ,
इनको चूस -चूसकर पीने को मन करता है .
कहीं खता न हो जाये दोनों से जरा बहक कर ,
इस एक बात के लिए शायद तेरा-मेरा मन डरता हैं .
छोडो अब इस जमाने की बातों को मेरे प्यारे से हमदम ,
आज तो कुछ देर के लिए तू पास मेरे आजा .
टूट जाने दे बीच की हर -एक दीवार को मंगल ,
आज तो कुछ इस तरह से तू मुझ में पूरी समां जा .
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