देखता हूँ जब भी आप को तो जाने क्या होता है?
सपने आते हैं आपके और दिल जाने कहा खोता है?
आजकल हर वक़्त रहता मुझको ख्याल बस एक आपका,
पूछे कोई कुछ भी पर लगता है सवाल बस एक आपका.
इस तरह से आप मेरे दिल और इस दिमाग पर छा गए,
सपनो को रहने दो अब तो दिन के खयालो में भी आ गए.
क्या इस तरह से ही मुझको अपने दिल का दर्द सहना होगा?
या आज अभी मिलकर तुमसे कुछ मुझे सच में कहना होगा.
चलो बिना किसी खास तरीके के सीधे शब्दों में पूछ ही लेता है मंगल ?
की जैसे मैं चाहता हू तुमको क्या तुमको भी वैसा ही प्यार हैं?
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