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Jul 20, 2010

सादगी श्रंगार हो गयी

तेरी सादगी श्रंगार हो गयी,
तब से आइनों की हार हो गयी.
तुमने हम को मोल क्या लिया,
अपनी जिंदगी भी उधार हो गयी.
देख तुझको महका महका सा,
अपनी साँसे आज बेकरार हो गयी.
देख कर तुझको हँसता ऐ हसीन,
दिल से चाहते भी बाहर हो गयी.
करते हो प्यार तुम भी जब मुझे,
फिर आज क्यूँ समझदार हो गयी.
अपना काम हैं चाहना उन्हें मंगल,
तो अपनी जिंदगी क्यूँ दुश्वार हो गयी...

Mar 19, 2010

“Our Pure Lust”

I feel the warmth of your body against me,
You try to pull away, but my hold on you sure,
Your body goes limp as your eyes close.
Your breathing increases, your heart begins to pound,
I kiss your breast, then lay you down.
I caress my body with an evil smile,
proud of the conquer I've wanted for awhile.
I tie your wrist and blindfold your eyes,
Now i know you're mine for the taking.
My tongue and lips explore your body,
Causing it to heave, now i know You're ready.
I lay on top of you and kiss your neck,
then slid down between your thighs,
exploring the treasure I've claim as my prize.
Your pulse increases and your body starts to move,
You scream in ecstasy, as I begin to slide,
Up your body to spread your legs wide.
Then I thrust myself into you,
Over and over, harder and harder
your screams increase, and entice me farther.
The pressure is building, it's beyond control,
I explode inside you, with a final thrust,
The moment is over, It's all about our pure lust...

Feb 26, 2010

"अगर मैं लिखू"

अगर मैं लिखू उनकी काली-चमकीली जुल्फों को काली बदली के जैसा.
अब भला कोई बादल भी इतना कला और घना इन दिनों होता हैं कहीं.
अगर मैं लिखू उनकी दोनों आँखों को किसी म्रग जैसा तो मुमकिन नहीं,
जो कशिश हैं आँखों में उनकी वो अब वो हिरन में भी ढूंढें से मिलती नहीं.
हर दफा उन्होंने लुटा हैं हमे अपने रेशमी से चेहरे की दिल-कश लाली से,
लाख ढूँढने पर भी हमे ये लाली जहाँ की किसी बगिया में कहीं मिलती नहीं.
छिपा कर रखिये जरा अपने गुलाब की नरम पत्तियों से नाजुक गुलाबी लबों को,
हर शख्स पूछता हैं मुझसे की जाने क्यूँ अब ये सारे गुलाब पहले जैसे गुलाबी नहीं?
हो सके मुमकिन तो अब ऐसे हर एक बात पर मुस्कराना बंद कर दो मेरे हुजुर जरा,
इन दिनों यूँ चमकना आसमानी बिजली का जरा-जरा सी बात पर कोई अच्छा नहीं.
जब भी निकलो सरे-राह खुद को जरा सा आँचल के पीछे मेरे सनम छुपा कर रखना,
देखे कोई मेरे सिवाय तेरे इस शीशे से हुस्न को ऐसा कुछ भी दिल को मेरे जचंता नहीं.
अरे ! बलखाती चाल तो हैं तेरे महबूब की जैसे हवा में सरकता कोई सुखा सा पत्ता मंगल,
हर कदम पर अपनी अदाओ से धड़काना मेरे दिल को  इश्क में कोई अच्छी बात  नहीं...

Feb 12, 2010

मेरा प्यारा मुल्क हिंदुस्तान"

खुदा की ये एक खास रहमत है,
मेरे बुजुर्गों के दिल की एक आखिरी हसरत है.
ये तो है कई नस्लों की कुर्बानी,
अरे ये तो कई नस्लों की मेहनत है.
ये हैं तोहफा उन जियालों को,
जिन शहीदों की ये आखिरी अमानत है.
तभी तो रखा है खुद उस खुदा ने ,
मेरे प्यारे मुल्क का नाम "हिंदुस्तान".
अँधेरा बस एक यही मिटाएगा,
उजाला बनकर दुनिया में बस ये ही छायेगा.
अगर है ये कोई किस्सा इंकलाबी,
तो नयी दुनिया भी ये ही बनाएगा.
अरे रखना खुदा हम पर यूँही इनायत,
तो हम एक दिन वो भी लायेंगे!
चाहे भागे वक़्त कितने तेज़ कदमो से,
अपने मुल्क को सदा उससे आगें ही पहुचायेंगे.
तभी तो रखा है खुद उस खुदा ने मंगल ,
मेरे प्यारे मुल्क का नाम "हिंदुस्तान".


Feb 9, 2010

न जाना होता....

मैं अपनी जिंदगी के किस अजीब से मोड़ पर खड़ा हूँ,
इस मोड़ के हर तरफ बस सड़क ही सड़क जाती हैं.
हर एक सड़क खुद रहगुजर है किसी अपनी मंजिल की,
वो मंजिल जो कभी मेरी जिंदगी का आखरी मकसद थी.
जाने आज फिर से क्यों हवा उसी मंजिल को बह रही हैं?
और न चाहते हुए भी मुझे उसी पुरानी राह पर जाना होगा.
यूँ तो हर राह की खुद अपनी एक बिल्कुल अलग कहानी है,
मगर मुझे तो इस राह की जुबानी अपनी कहानी सुनानी हैं.
कभी खड़ा रहता था हर दम दिल से में बस उसकी राह पर,
पर जाने क्यूँ मेरे हम दम ने मुझे और राह दोनों को बदल दिया?
माना मैं नहीं था कभी भी तेरे दिल और तेरे प्यार दोनों के काबिल
अरे मुझ से सिर्फ कहा होता, मैं खुद ही अपनी राहों को बदल देता.
और इस तरह तेरे उस हम दम को तेरे जीते-जी कभी भी मंगल,
छिपने के लिए इस दुनिया से उस दुनिया की राह पर न जाना होता..

Jan 31, 2010

"न जाना होता....."

मैं अपनी जिंदगी के किस अजीब से मोड़ पर खड़ा हूँ,
इस मोड़ के हर तरफ बस सड़क ही सड़क जाती हैं.
हर एक सड़क खुद रहगुजर है किसी अपनी मंजिल की,
वो मंजिल जो कभी मेरी जिंदगी का आखरी मकसद थी.
जाने आज फिर से क्यों हवा उसी मंजिल को बह रही हैं?
और न चाहते हुए भी मुझे उसी पुरानी राह पर जाना होगा.
यूँ तो हर राह की खुद अपनी एक बिल्कुल अलग कहानी है,
मगर मुझे तो इस राह की जुबानी अपनी कहानी सुनानी हैं.
कभी खड़ा रहता था हर दम दिल से में बस उसकी राह पर,
पर जाने क्यूँ मेरे हम दम ने मुझे और राह दोनों को बदल दिया?
माना मैं नहीं था कभी भी तेरे दिल और तेरे प्यार दोनों के काबिल
अरे मुझ से सिर्फ कहा होता, मैं खुद ही अपनी राहों को बदल देता.
और इस तरह तेरे उस हम दम को तेरे जीते-जी कभी भी मंगल,
छिपने के लिए इस दुनिया से उस दुनिया की राह पर न जाना होता..

Nov 27, 2009

कमसिन जवानी

देखकर  आपकी  इस  तड़पती  कमसिन  जवानी  को ,
मेरे  भी  लबो  पर  मीठा  सा  पानी  आ  गया .
जो  एक  बार  दिखाया  मैंने  आपको  कुछ  अपना ,
वो  एक  बार  में  आपके  मन  भा  गया .
तेरे  इन  लाल -लाल  लबों  की  रसभरी  फांकें ,
इनको  चूस -चूसकर  पीने को  मन  करता  है .
कहीं  खता  न  हो  जाये  दोनों  से  जरा  बहक  कर ,
इस  एक  बात  के  लिए  शायद  तेरा-मेरा  मन  डरता  हैं .
छोडो  अब  इस  जमाने  की  बातों  को  मेरे प्यारे से हमदम  ,
आज  तो  कुछ  देर  के  लिए  तू  पास  मेरे  आजा .
टूट  जाने  दे  बीच  की  हर -एक  दीवार  को मंगल ,
आज  तो  कुछ  इस  तरह  से  तू  मुझ  में  पूरी समां  जा .

रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे..

रात के अंधेरो में यादो के जुगनू चमकते रहे,
रुकी हुई हवा में भी दर्द के फूल महकते रहे.
उनकी शोला आँखों से ये सर्द निगाहे क्या मिली,
मेरे सारे बदन के अन्दर अंगारे से दहकते रहे.
चाँद तो भटकता रहा है सूरज की तलाश में,
मेरे इस सुने दिल के आसमा मे तारे झपकते रहे,
गम की इन्तहा न पूछो बता नहीं पाउँगा तुमको,
उनके इंतजार मे मेरे जख्म तो रोते-बिलखते रहे.
उसकी चाहत का तो कोई सुराग न पा सका मंगल,
बाकी रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे....

प्यासी जवानी है......

जाने लोग कैसे पहुच जाते है इश्क में उस मुकाम पर,
जब बन जाते है वो एक-दूजे के लिए दिलजानी है.
मेरी और उनकी तो इश्क में बस इतनी सी कहानी है,
हमारी दो-दो सूजी हुई आँखे और उनमे बचा थोडा सा पानी है.
अपना दिया हुआ हर एक गुलाब किताबो में उनकी दम तोड़ चुका,
और उन्हें ये अब याद भी नहीं की ये किस आशिक की निशानी है.
अब तो याद करके गुजरेगी तमाम उम्र अपनी जब कहा था उसने,
अब तो वो भी बन चुकी शायद मेरे प्यार में पूरी की पूरी दीवानी है.
उफ़! यह जहाँ तो लूटता है अक्सर मज़े तमाम इस मोह्हबत में मंगल,
अगर बची है कोई बस प्यार के लिए तो वों शायद तेरी ही प्यासी जवानी है......

Nov 14, 2009

"क्या तुमको भी वैसा ही प्यार हैं? "

देखता हूँ जब भी आप को तो जाने क्या होता है?
सपने आते हैं आपके और दिल जाने कहा खोता है?

आजकल हर वक़्त रहता मुझको ख्याल बस एक आपका,

पूछे कोई कुछ भी पर लगता है सवाल बस एक आपका.

इस तरह से आप मेरे दिल और इस दिमाग पर छा गए,

सपनो को रहने दो अब तो दिन के खयालो में भी आ गए.

क्या इस तरह से ही मुझको अपने दिल का दर्द सहना होगा?

या आज अभी मिलकर तुमसे कुछ मुझे सच में कहना होगा.

चलो बिना किसी खास तरीके के सीधे शब्दों में पूछ ही लेता है मंगल ?

की जैसे मैं चाहता हू तुमको क्या तुमको भी वैसा ही प्यार हैं?