रात के अंधेरो में यादो के जुगनू चमकते रहे,
रुकी हुई हवा में भी दर्द के फूल महकते रहे.
उनकी शोला आँखों से ये सर्द निगाहे क्या मिली,
मेरे सारे बदन के अन्दर अंगारे से दहकते रहे.
चाँद तो भटकता रहा है सूरज की तलाश में,
मेरे इस सुने दिल के आसमा मे तारे झपकते रहे,
गम की इन्तहा न पूछो बता नहीं पाउँगा तुमको,
उनके इंतजार मे मेरे जख्म तो रोते-बिलखते रहे.
उसकी चाहत का तो कोई सुराग न पा सका मंगल,
बाकी रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे....
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