मुझे याद है अब तक तेरा वो धीमे से मुस्कुराना,
धीरे -धीरे चोरी से मेरे दिल को यूँ अदा से चुराना.
जब भी चाहा तो मुझसे तूने दिल्लगी सी कर ली,
मेरे रूठ जाने पर फिर एक अदा से मुझको रिझाना.
आप कुछ इस तरह से मुझ से चाहत करते रहे हैं,
मोहब्बत में आपकी याद में हम हर-दम मरते रहे हैं.
चलो रहने दो इस एक तरफा आशिकी को अभी मंगल,
तुझे गम और उनको उन गैरो की झूठी चाहत मुबारक हो.......
nice
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