Nov 19, 2009

वो भी मुझे चाहते हैं"

अपने सनम की हर एक अदा पर हम जान से जाते हैं,
और वो बेगैरत इसे दिल्लगी का हसीं बहाना बताते हैं.
हर दफा खुद को एक और मौत मरने से रोका है हमने,
जब-जब मेरे सनम देखकर मुझे थोड़ा धीमे से मुस्कुराते हैं.
आज तक नहीं समझ सका हूँ की क्या है दिल है दिल में उनके?
अरे! कभी तो लगातार देखते है मुझको तो कभी नजरे चुराते हैं.
क्या खूब आ रही थी खुशबू कल शाम लम्बी जुल्फों से उनकी?
शायद वो ही इस सारे जहाँ को अपनी ताज़ी महक से महका रहे हैं.
सच में हर उस वक़्त मैं आज भी खड़ा रहता हूँ राहों में घर की उनकी,
जब-जब सुबह और शाम वो अपने घर से कहीं बाहर आतें और जातें हैं.
हाँ, इस एक चाहत की वजह से ही जिंदगी को खुशी से जी रहा हैं मंगल,
कि मेरे जैसे न सही मगर अपने दिल में थोड़ा सा तो वो भी मुझे चाहते हैं....

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