मेरे बुजुर्गों के दिल की एक आखिरी हसरत है.
ये तो है कई नस्लों की कुर्बानी,
अरे ये तो कई नस्लों की मेहनत है.
ये हैं तोहफा उन जियालों को,
जिन शहीदों की ये आखिरी अमानत है.
तभी तो रखा है खुद उस खुदा ने ,
मेरे प्यारे मुल्क का नाम "हिंदुस्तान".
अँधेरा बस एक यही मिटाएगा,
उजाला बनकर दुनिया में बस ये ही छायेगा.
अगर है ये कोई किस्सा इंकलाबी,
तो नयी दुनिया भी ये ही बनाएगा.
अरे रखना खुदा हम पर यूँही इनायत,
तो हम एक दिन वो भी लायेंगे!
चाहे भागे वक़्त कितने तेज़ कदमो से,
अपने मुल्क को सदा उससे आगें ही पहुचायेंगे.
तभी तो रखा है खुद उस खुदा ने मंगल ,
मेरे प्यारे मुल्क का नाम "हिंदुस्तान".
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