उफ़ ये मोह्हब्बत के दिन भी कितने अजीब हैं?
कहने को वो दूर मुझसे पर दिल के करीब हैं.
कई सालो से मैं उनको कुछ कहना चाहता हूँ,
जाने किस डर से डर कर मैं चुप ही रह जाता हूँ.
आज मैं फिर उनके सामने इज़हार-ऐ-इश्क चाहता हूँ,
एक बार फिर अपने दिल की हिम्मत को आजमाता हूँ.
हाँ आज कल मौसम भी इश्क के रंग में रंगा हैं मंगल,
हो सके तो तू भी खुद को सनम के रंग में रंगीन कर ले...
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