Sep 12, 2010

"साँसों की माला"

साँसों की माला पर लिखा हैं,
मैंने तो अपने पिया का नाम.
मेरे मन की तो बस जानू मैं,
पिया के मन की जाने मेरा राम.
इस प्रेम के रंग में ऐसी डूबी,
जैसे डूबे अन्धकार में कोई शाम ,
अब ये प्रेम करना ही काम मेरा,
करती हूँ इसे रोज़ सुबह से शाम.
पिया को कैसे दोष दूँ अनजाने में भी,
जब वो तो हैं बिलकुल ही निष्काम.
तुमने कभी कुछ कहा नहीं पिया मंगल,
खुद से ही बातें कर मैं हो गयी बदनाम...

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