अभी न जाओ छोड़कर,
तुम्हे मेरी हैं कसम.
तुम ही तो हो दिलबर मेरे,
तुम ही तो हो मेरे सनम.
तुम रहते हो खफा-खफा,
हैं ये सजा किस बात की?
आओ सनम लग जाओ गले,
ये रात हैं पहली मुलाकात की.
एक बार तो कह दो जरा ,
मैं कौन हूँ तेरे लिए?
बंदगी तो मैं करता नहीं,
हैं खुदा तू अब मेरे लिए.
एक आप है और एक इश्क ये,
दोनों ने ही मुझे गम दिए.
बस है तो ख़ुशी इस बात की मंगल,
की जितने दिए बड़े कम दिए.....
Hi, this blog is created to publish my feelings and experiences about this life and the world..through my words or poems. In this blog ,every posted poem is my own creation and no one can use these poems with his credit.. so add me in the list of your favorites and visit my life via this blog and my poems... Thank you... Jaimangal Singh, Ek Aur Shayar....
Jul 26, 2010
Jul 20, 2010
सादगी श्रंगार हो गयी
तेरी सादगी श्रंगार हो गयी,
तब से आइनों की हार हो गयी.
तुमने हम को मोल क्या लिया,
अपनी जिंदगी भी उधार हो गयी.
देख तुझको महका महका सा,
अपनी साँसे आज बेकरार हो गयी.
देख कर तुझको हँसता ऐ हसीन,
दिल से चाहते भी बाहर हो गयी.
करते हो प्यार तुम भी जब मुझे,
फिर आज क्यूँ समझदार हो गयी.
अपना काम हैं चाहना उन्हें मंगल,
तो अपनी जिंदगी क्यूँ दुश्वार हो गयी...
तब से आइनों की हार हो गयी.
तुमने हम को मोल क्या लिया,
अपनी जिंदगी भी उधार हो गयी.
देख तुझको महका महका सा,
अपनी साँसे आज बेकरार हो गयी.
देख कर तुझको हँसता ऐ हसीन,
दिल से चाहते भी बाहर हो गयी.
करते हो प्यार तुम भी जब मुझे,
फिर आज क्यूँ समझदार हो गयी.
अपना काम हैं चाहना उन्हें मंगल,
तो अपनी जिंदगी क्यूँ दुश्वार हो गयी...
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