Jul 26, 2010

अभी न जाओ छोड़कर,

अभी न जाओ छोड़कर,
तुम्हे मेरी हैं कसम.
तुम ही तो हो दिलबर मेरे,
तुम ही तो हो मेरे सनम.
तुम रहते हो खफा-खफा,
हैं ये सजा किस बात की?
आओ सनम लग जाओ गले,
ये रात हैं पहली मुलाकात की.
एक बार तो कह दो जरा ,
मैं कौन हूँ तेरे लिए?
बंदगी तो मैं करता नहीं,
हैं खुदा तू अब मेरे लिए.
एक आप है और एक इश्क ये,
दोनों ने ही मुझे गम दिए.
बस है तो ख़ुशी इस बात की मंगल,
की जितने दिए बड़े कम दिए.....

Jul 20, 2010

सादगी श्रंगार हो गयी

तेरी सादगी श्रंगार हो गयी,
तब से आइनों की हार हो गयी.
तुमने हम को मोल क्या लिया,
अपनी जिंदगी भी उधार हो गयी.
देख तुझको महका महका सा,
अपनी साँसे आज बेकरार हो गयी.
देख कर तुझको हँसता ऐ हसीन,
दिल से चाहते भी बाहर हो गयी.
करते हो प्यार तुम भी जब मुझे,
फिर आज क्यूँ समझदार हो गयी.
अपना काम हैं चाहना उन्हें मंगल,
तो अपनी जिंदगी क्यूँ दुश्वार हो गयी...