Jul 20, 2010

सादगी श्रंगार हो गयी

तेरी सादगी श्रंगार हो गयी,
तब से आइनों की हार हो गयी.
तुमने हम को मोल क्या लिया,
अपनी जिंदगी भी उधार हो गयी.
देख तुझको महका महका सा,
अपनी साँसे आज बेकरार हो गयी.
देख कर तुझको हँसता ऐ हसीन,
दिल से चाहते भी बाहर हो गयी.
करते हो प्यार तुम भी जब मुझे,
फिर आज क्यूँ समझदार हो गयी.
अपना काम हैं चाहना उन्हें मंगल,
तो अपनी जिंदगी क्यूँ दुश्वार हो गयी...

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