आज फिर से मेरा दिल वैसे ही घबराता हैं,
जैसे कोई अपना जिंदगी से दूर कहीं जाता हैं.
लाख कोशिशों के बाद भी याद तो जाती नहीं हैं ,
और एक ये बीती हुई जिंदगी वापस आती नहीं हैं.
हर एक धड़कन तो अब भी उनका ही नाम लेती हैं,
मगर दुनिया के डर से आंसू बाहर निकल नहीं पाते हैं.
बस इस तरह से सारी उम्र कट जायेगी तेरी यूँही मंगल,
सिर्फ हो सके तो अपने इस बेकाबू मन पर थोड़ा सा काबू रखना...
By-- Jaimangal singh,ek aur shayar..
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