अभी न जाओ छोड़कर,
तुम्हे मेरी हैं कसम.
तुम ही तो हो दिलबर मेरे,
तुम ही तो हो मेरे सनम.
तुम रहते हो खफा-खफा,
हैं ये सजा किस बात की?
आओ सनम लग जाओ गले,
ये रात हैं पहली मुलाकात की.
एक बार तो कह दो जरा ,
मैं कौन हूँ तेरे लिए?
बंदगी तो मैं करता नहीं,
हैं खुदा तू अब मेरे लिए.
एक आप है और एक इश्क ये,
दोनों ने ही मुझे गम दिए.
बस है तो ख़ुशी इस बात की मंगल,
की जितने दिए बड़े कम दिए.....
Pretty cool poem !
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