आज फिर फिजा में छाई रंगों की बहार हैं,
शायद आया फिर से होली का ही त्यौहार हैं.
रंग, गुलाल और अबीर को तो अब छोडो भी,
लेकर भांग और ठंडाई हर कोई दिल से तैयार हैं.
कहीं पर शोर हैं गर फागुन के चुलबुले से गीतों का,
तो कहीं पर होली के बहाने से हो रहा प्यार ही प्यार हैं.
अगर हो मुमकिन तो दिल से सबसे आज गले मिल लो,
क्यूंकि इश्क और मोहब्बत पर टिका ये सारा संसार हैं.
बस अब लेने दो सब को मजा इस रंगीन होली का मंगल,
कहने से कुछ हासिल नहीं वहा जहाँ हर कोई समझदार हैं...
होली की शुभकामनाए.nice
ReplyDeleteहो न फिर फसाद , मजहब के नाम पर
ReplyDeleteकेसर में हरा रंग मिले ,इस बार होली में !