Nov 27, 2009

कमसिन जवानी

देखकर  आपकी  इस  तड़पती  कमसिन  जवानी  को ,
मेरे  भी  लबो  पर  मीठा  सा  पानी  आ  गया .
जो  एक  बार  दिखाया  मैंने  आपको  कुछ  अपना ,
वो  एक  बार  में  आपके  मन  भा  गया .
तेरे  इन  लाल -लाल  लबों  की  रसभरी  फांकें ,
इनको  चूस -चूसकर  पीने को  मन  करता  है .
कहीं  खता  न  हो  जाये  दोनों  से  जरा  बहक  कर ,
इस  एक  बात  के  लिए  शायद  तेरा-मेरा  मन  डरता  हैं .
छोडो  अब  इस  जमाने  की  बातों  को  मेरे प्यारे से हमदम  ,
आज  तो  कुछ  देर  के  लिए  तू  पास  मेरे  आजा .
टूट  जाने  दे  बीच  की  हर -एक  दीवार  को मंगल ,
आज  तो  कुछ  इस  तरह  से  तू  मुझ  में  पूरी समां  जा .

बहुत याद आया

आज बिछड़ा हुआ एक दोस्त बहुत याद आया,
अच्छा गुज़रा हुआ कुछ वक्त बहुत याद आया,

कुछ लम्हे, साथ बिताए कुछ पल,
साथ मे बैठ कर गुनगुनाया वो गीत बहुत याद आया,

इक मुस्कान, इक हँसी, इक आँसू, इएक दर्द,
वो किसी बात पे हँसते हँसते रोना बहुत याद आया,

वो रात को बातों से एक दूसरे को परेशान करना,
आज सोते वक्त वही ख्याल बहुत याद आया,

कुछ कह कर उसको चिढ़ाना और उसका नाराज़ हो जाना,
देख कर भी उसका अनदेखा कर परेशान करना बहुत याद आया,

मुझे उदास देख उसकी आँखें भर आती हैं,
आज अकेला हूँ तो वो बहुत याद आया,

मेरे दिल के करीब थी उसकी बातें,
जब दिल ने आवाज़ लगाई तो बो बहुत याद आया,

मेरी ज़िन्दगी की हर खुशी मे शामिल उसकी मौजूदगी,
आज खुश होने का दिल किया तो वो बहुत याद आया,

मेरे दर्द को अपनानाने का दावा था उसका,
मुझ से अलग हो मुझे दर्द देने वाला बहुत याद आया,

मेरी कविता पर कभी हँसना तो कभी हैरान हो जाना,
सब समझ कर भी अन्जान बने रहना बहुत याद आया,

उनकी पुरानी तस्वीरों को लेकर बैठा है आज मंगल,
फिर मिलने की उम्मीद देकर जिसका अलविदा कहना बहुत याद आया

तुम भी अब जवानी में आ गए.....

जाने क्या सोच कर मोह्हब्बत की राह पर आगये,
क्या देखा उन्होंने मुझमे ऐसा जो उनको भी भागए.
हमने तो बस शेखी में यूँही कर दिए थे कुछ इशारे,
मगर वो तो फौरन ही असली मुद्दों पर आ गए.
मैंने जो पकड़ना चाहा था हाथो को हल्के से उनके,
वो तो एकदम से ही मेरे इन पहलुओ में समां गए.
बीच-बीच में थोडी-थोडी शरारत भी चलती रही,
और वो इस तरह से हमे प्यार करना ही सिखा गए.
अचानक से छु गयी थी उंगलिया उनके नाजुक लबो से,
और वो लेकर अपने लबो को हमारे लबो में ही समां गए.
काफी देर तक युही कोशिश करता रहा था उन पर मंगल,
तो आखिर में वो बोले की तुम भी अब जवानी में आ गए.....

यादें

इसकी यादें उसकी यादें,
आखिर मुझको क्यों आती है?
कल के उन भूले-बिसरे से पलो में ले जाती है.
क्यों उस वक़्त के चंद लम्हे
आज की एक मुद्दत में बदल से जाते है!
याद कर उन खास पलो को ,
होते है कभी गुस्सा तो कभी मुस्काते है.
अक्सर मेरी यादों में एक अजीब हूक सी उठती है!
जो पल भर मे किसी अपने को गैर
और किसी गैर को बिलकुल अपना करती है.
कभी भीनी सी खुशबू मे महकी यादें
बचपन मे खाई मिटटी की डली सी बन जाती है,
तो कभी वही यादें बिदाई की बेला पर
याद कर बहन की बातो को अकेले मे रुलाती है.
तभी तो रोज़ ही खुद से पूछता है मंगल,
की आखिर ये यादें क्यों आती है.....

रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे..

रात के अंधेरो में यादो के जुगनू चमकते रहे,
रुकी हुई हवा में भी दर्द के फूल महकते रहे.
उनकी शोला आँखों से ये सर्द निगाहे क्या मिली,
मेरे सारे बदन के अन्दर अंगारे से दहकते रहे.
चाँद तो भटकता रहा है सूरज की तलाश में,
मेरे इस सुने दिल के आसमा मे तारे झपकते रहे,
गम की इन्तहा न पूछो बता नहीं पाउँगा तुमको,
उनके इंतजार मे मेरे जख्म तो रोते-बिलखते रहे.
उसकी चाहत का तो कोई सुराग न पा सका मंगल,
बाकी रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे....

प्यासी जवानी है......

जाने लोग कैसे पहुच जाते है इश्क में उस मुकाम पर,
जब बन जाते है वो एक-दूजे के लिए दिलजानी है.
मेरी और उनकी तो इश्क में बस इतनी सी कहानी है,
हमारी दो-दो सूजी हुई आँखे और उनमे बचा थोडा सा पानी है.
अपना दिया हुआ हर एक गुलाब किताबो में उनकी दम तोड़ चुका,
और उन्हें ये अब याद भी नहीं की ये किस आशिक की निशानी है.
अब तो याद करके गुजरेगी तमाम उम्र अपनी जब कहा था उसने,
अब तो वो भी बन चुकी शायद मेरे प्यार में पूरी की पूरी दीवानी है.
उफ़! यह जहाँ तो लूटता है अक्सर मज़े तमाम इस मोह्हबत में मंगल,
अगर बची है कोई बस प्यार के लिए तो वों शायद तेरी ही प्यासी जवानी है......

Nov 19, 2009

आज ठानी है तुझे आजमाने की

जब से इस ग़म की फितरत है ऐसे मुझको सताने की,
तब से मेरी भी बस एक ही जिद है उसे सच में हराने की.
माना की ये भी सच है की छुपा न पाउँगा आँखों की नमी,
कुछ खास नहीं ये तो अपनी कोशिश है कुछ मुस्कुराने की.
खुदा कसम! आज भी दिल है तुम्हारा एक सच्चे मोती जैसा,
तो फिर भला और क्या ज़रूरत तुम्हे यूँ कुछ नए खजाने की.
अपनी हद से ज्यादा उसको टूट कर चाहना और फिर मर जाना,
वाह -वाह क्या खूब बढ़िया बनाई है उस खुदा ने तकदीर परवाने की.
मेरी इस जिन्दा लाश के अकेले धड़कते सीने की कब्र में दिल है मुर्दा,
छोड़ो ऐसे न करो जिद मुझे और मेरे गमो को फिर से जिलाने की.
जब चले गाँव से तो खेत छूटे और न शहर में मुझको रोज़गार मिला,
शायद जिंदगी देती है यूँही सबसे बड़ी सजा गाँव से शहर में आने की.
कुछ गलत न समझना! सबसे आखिर में मुफलिसी में पुकारा है मंगल,
हो सकता है की मेरे दिल और दिमाग ने आज ठानी है तुझे आजमाने की....

बेकाबू मन

आज फिर से मेरा दिल वैसे ही घबराता हैं,
जैसे कोई अपना जिंदगी से दूर कहीं जाता हैं.
लाख कोशिशों के बाद भी याद तो जाती नहीं हैं ,
और एक ये बीती हुई जिंदगी वापस आती नहीं हैं.
हर एक धड़कन तो अब भी उनका ही नाम लेती हैं,
मगर दुनिया के डर से आंसू बाहर निकल नहीं पाते हैं.
बस इस तरह से सारी उम्र कट जायेगी तेरी यूँही मंगल,
सिर्फ हो सके तो अपने इस बेकाबू मन पर थोड़ा सा काबू रखना...

वो भी मुझे चाहते हैं"

अपने सनम की हर एक अदा पर हम जान से जाते हैं,
और वो बेगैरत इसे दिल्लगी का हसीं बहाना बताते हैं.
हर दफा खुद को एक और मौत मरने से रोका है हमने,
जब-जब मेरे सनम देखकर मुझे थोड़ा धीमे से मुस्कुराते हैं.
आज तक नहीं समझ सका हूँ की क्या है दिल है दिल में उनके?
अरे! कभी तो लगातार देखते है मुझको तो कभी नजरे चुराते हैं.
क्या खूब आ रही थी खुशबू कल शाम लम्बी जुल्फों से उनकी?
शायद वो ही इस सारे जहाँ को अपनी ताज़ी महक से महका रहे हैं.
सच में हर उस वक़्त मैं आज भी खड़ा रहता हूँ राहों में घर की उनकी,
जब-जब सुबह और शाम वो अपने घर से कहीं बाहर आतें और जातें हैं.
हाँ, इस एक चाहत की वजह से ही जिंदगी को खुशी से जी रहा हैं मंगल,
कि मेरे जैसे न सही मगर अपने दिल में थोड़ा सा तो वो भी मुझे चाहते हैं....

Nov 18, 2009

You my true Ecstasy

Your love is a drug to me,
I couldn’t get an enough of you,

The way you had touch,

Had put my soul in easy,

Every time I make love to you,

I feel like I am flowing on heavy clouds,

Your sex is a like addiction to me,

I keep coming back for more,

Your looks and your charms what made me high,

Feasting mine soul with your fat long manhood squeezing inside of me,

Had bring out lust in my eyes,

Rubbing my hand so gentle on your chest,

I couldn’t resist smell your strong sweet body mist had bring essence in me,

You will feel my hot kisses, kissing on chest,

Night and Day, I couldn’t stop thinking about you…

Just because that you are my true Ecstasy...

Nov 15, 2009

शक

भला कौन इंसान तन्हाई में नहीं रोता है,
भला किसके सीने में कोई दर्द नहीं होता है.
जब जिंदगी को जीना है तो ख़ुशी से ही जियो मंगल,
भला नाकामी में किसको खुद के अस्तित्व पर शक नहीं होता है..

झूठी चाहत मुबारक हो

मुझे याद है अब तक तेरा वो धीमे से मुस्कुराना,

धीरे -धीरे चोरी से मेरे दिल को यूँ अदा से चुराना.

जब भी चाहा तो मुझसे तूने दिल्लगी सी कर ली,

मेरे रूठ जाने पर फिर एक अदा से मुझको रिझाना.

आप कुछ इस तरह से मुझ से चाहत करते रहे हैं,

मोहब्बत में आपकी याद में हम हर-दम मरते रहे हैं.

चलो रहने दो इस एक तरफा आशिकी को अभी मंगल,

तुझे गम और उनको उन गैरो की झूठी चाहत मुबारक हो.......

Nov 14, 2009

"क्या तुमको भी वैसा ही प्यार हैं? "

देखता हूँ जब भी आप को तो जाने क्या होता है?
सपने आते हैं आपके और दिल जाने कहा खोता है?

आजकल हर वक़्त रहता मुझको ख्याल बस एक आपका,

पूछे कोई कुछ भी पर लगता है सवाल बस एक आपका.

इस तरह से आप मेरे दिल और इस दिमाग पर छा गए,

सपनो को रहने दो अब तो दिन के खयालो में भी आ गए.

क्या इस तरह से ही मुझको अपने दिल का दर्द सहना होगा?

या आज अभी मिलकर तुमसे कुछ मुझे सच में कहना होगा.

चलो बिना किसी खास तरीके के सीधे शब्दों में पूछ ही लेता है मंगल ?

की जैसे मैं चाहता हू तुमको क्या तुमको भी वैसा ही प्यार हैं?

Nov 11, 2009

"खुदा ने ज़मीं पर हैं बुलाया"

आज देखकर उनको फिर से एक वही ख्याल आया,
उनकी मौजूदगी देती है मुझको तेज़ घनी धूप में साया.
अगर उन्होंने खुद को हम से छुपा लिया तो क्या होगा?
इस एक डर ने मुझे कल रात भर पूरे आंसुओं से था रुलाया.
बस उनके सहारे सारी दुनिया से लड़ने का माद्दा रखता हूँ मैं,
हार तभी सकता हूँ किसी से गर उन्होंने न मेरा हौसला बढाया.
हाँ इसी एक तरीके से अपनी पूरी जिंदगी बिता देगा यहाँ मंगल,
क्योंकि सिर्फ उनके लिए मुझे खुदा ने इस ज़मीं पर हैं बुलाया....