Dec 26, 2009

"इश्क किया नहीं जाता बस खुद-ब-खुद हो जाता हैं."

लो इन दिनों दिल मेरा कुछ अजीब सा हैं,
मानो या न मानो तुम कोई मेरे करीब सा हैं.
मैं तो हर एक पल उनकी ही यादों में खोया हूँ,
वो न दिखे जब भी मुझको तो मैं खूब रोया हूँ.
इस एक तरीके से जिंदगी को गुनगुना रहा हूँ,
खुशी हो या गम बस प्यार का गीत गा रहा हूँ.
तुम चाहो तो भी मेरी तरह से नहीं जी सकते मंगल,
क्यूंकि इश्क किया नहीं जाता बस खुद-ब-खुद हो जाता हैं.....

Dec 2, 2009

"जगा ले मुझको"

आइना बनाकर अपने इस दिल में लगा ले मुझको,
मैं तो हूँ तस्वीर तेरी घर में अपने सजा ले मुझको.
इन काली तेज़ आँधियों में रोशन आखिरी चिराग हूँ,
हवाओं से बुझ जाऊंगा अब आकर तू बचा ले मुझको.
दीदारे-हसरत से तेरे आज देखता हूँ मैं घर को तेरे,
कहीं कोई तेरी इस गली से आज न निकाले मुझको.
हाँ,मेरी तो राख भी रहेगी सच में एहसान मंद तेरी,
गर समझकर मेहंदी एक बार हथेली पर रचा ले मुझको.
अकेला उड़ता परिंदा हूँ,नोच देंगे ये दरिन्दे शायद मुझे,
तू अपने इस दामन में आज कही अन्दर छुपा ले मुझको.
उम्र-भर तो इस जहाँ की फ़िक्र में जगा रहा हूँ मैं यहाँ,
अरे कुछ देर तो अपनी बाँहों के दरमियाँ तू सुला ले मुझको.
हर एक बार मैंने ही मनाया है इन रूठे हुए लोगों को यहाँ,
इस आखिरी बार तो आकर तू प्यार से बस मना ले मुझको.
मुद्दत से सोया हुआ हैं अपनी ही तन्हाई के साथ में मंगल,
अब तो कोई जरा से प्यार से इस नींद से जगा ले मुझको...

Nov 27, 2009

कमसिन जवानी

देखकर  आपकी  इस  तड़पती  कमसिन  जवानी  को ,
मेरे  भी  लबो  पर  मीठा  सा  पानी  आ  गया .
जो  एक  बार  दिखाया  मैंने  आपको  कुछ  अपना ,
वो  एक  बार  में  आपके  मन  भा  गया .
तेरे  इन  लाल -लाल  लबों  की  रसभरी  फांकें ,
इनको  चूस -चूसकर  पीने को  मन  करता  है .
कहीं  खता  न  हो  जाये  दोनों  से  जरा  बहक  कर ,
इस  एक  बात  के  लिए  शायद  तेरा-मेरा  मन  डरता  हैं .
छोडो  अब  इस  जमाने  की  बातों  को  मेरे प्यारे से हमदम  ,
आज  तो  कुछ  देर  के  लिए  तू  पास  मेरे  आजा .
टूट  जाने  दे  बीच  की  हर -एक  दीवार  को मंगल ,
आज  तो  कुछ  इस  तरह  से  तू  मुझ  में  पूरी समां  जा .

बहुत याद आया

आज बिछड़ा हुआ एक दोस्त बहुत याद आया,
अच्छा गुज़रा हुआ कुछ वक्त बहुत याद आया,

कुछ लम्हे, साथ बिताए कुछ पल,
साथ मे बैठ कर गुनगुनाया वो गीत बहुत याद आया,

इक मुस्कान, इक हँसी, इक आँसू, इएक दर्द,
वो किसी बात पे हँसते हँसते रोना बहुत याद आया,

वो रात को बातों से एक दूसरे को परेशान करना,
आज सोते वक्त वही ख्याल बहुत याद आया,

कुछ कह कर उसको चिढ़ाना और उसका नाराज़ हो जाना,
देख कर भी उसका अनदेखा कर परेशान करना बहुत याद आया,

मुझे उदास देख उसकी आँखें भर आती हैं,
आज अकेला हूँ तो वो बहुत याद आया,

मेरे दिल के करीब थी उसकी बातें,
जब दिल ने आवाज़ लगाई तो बो बहुत याद आया,

मेरी ज़िन्दगी की हर खुशी मे शामिल उसकी मौजूदगी,
आज खुश होने का दिल किया तो वो बहुत याद आया,

मेरे दर्द को अपनानाने का दावा था उसका,
मुझ से अलग हो मुझे दर्द देने वाला बहुत याद आया,

मेरी कविता पर कभी हँसना तो कभी हैरान हो जाना,
सब समझ कर भी अन्जान बने रहना बहुत याद आया,

उनकी पुरानी तस्वीरों को लेकर बैठा है आज मंगल,
फिर मिलने की उम्मीद देकर जिसका अलविदा कहना बहुत याद आया

तुम भी अब जवानी में आ गए.....

जाने क्या सोच कर मोह्हब्बत की राह पर आगये,
क्या देखा उन्होंने मुझमे ऐसा जो उनको भी भागए.
हमने तो बस शेखी में यूँही कर दिए थे कुछ इशारे,
मगर वो तो फौरन ही असली मुद्दों पर आ गए.
मैंने जो पकड़ना चाहा था हाथो को हल्के से उनके,
वो तो एकदम से ही मेरे इन पहलुओ में समां गए.
बीच-बीच में थोडी-थोडी शरारत भी चलती रही,
और वो इस तरह से हमे प्यार करना ही सिखा गए.
अचानक से छु गयी थी उंगलिया उनके नाजुक लबो से,
और वो लेकर अपने लबो को हमारे लबो में ही समां गए.
काफी देर तक युही कोशिश करता रहा था उन पर मंगल,
तो आखिर में वो बोले की तुम भी अब जवानी में आ गए.....

यादें

इसकी यादें उसकी यादें,
आखिर मुझको क्यों आती है?
कल के उन भूले-बिसरे से पलो में ले जाती है.
क्यों उस वक़्त के चंद लम्हे
आज की एक मुद्दत में बदल से जाते है!
याद कर उन खास पलो को ,
होते है कभी गुस्सा तो कभी मुस्काते है.
अक्सर मेरी यादों में एक अजीब हूक सी उठती है!
जो पल भर मे किसी अपने को गैर
और किसी गैर को बिलकुल अपना करती है.
कभी भीनी सी खुशबू मे महकी यादें
बचपन मे खाई मिटटी की डली सी बन जाती है,
तो कभी वही यादें बिदाई की बेला पर
याद कर बहन की बातो को अकेले मे रुलाती है.
तभी तो रोज़ ही खुद से पूछता है मंगल,
की आखिर ये यादें क्यों आती है.....

रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे..

रात के अंधेरो में यादो के जुगनू चमकते रहे,
रुकी हुई हवा में भी दर्द के फूल महकते रहे.
उनकी शोला आँखों से ये सर्द निगाहे क्या मिली,
मेरे सारे बदन के अन्दर अंगारे से दहकते रहे.
चाँद तो भटकता रहा है सूरज की तलाश में,
मेरे इस सुने दिल के आसमा मे तारे झपकते रहे,
गम की इन्तहा न पूछो बता नहीं पाउँगा तुमको,
उनके इंतजार मे मेरे जख्म तो रोते-बिलखते रहे.
उसकी चाहत का तो कोई सुराग न पा सका मंगल,
बाकी रिश्ते भी एक-एक कर हाथो से खिशकते रहे....