Sep 20, 2009

जवानी में आ गए!

जाने क्या सोच कर मोह्हब्बत की राह पर आगये,
क्या देखा उन्होंने मुझमे ऐसा जो उनको भी भागए.
हमने तो बस शेखी में यूँही कर दिए थे कुछ इशारे,
मगर वो तो फौरन ही असली मुद्दों पर आ गए.
मैंने जो पकड़ना चाहा था हाथो को हल्के से उनके,
वो तो एकदम से ही मेरे इन पहलुओ में समां गए.
बीच-बीच में थोडी-थोडी शरारत भी चलती रही,
और वो इस तरह से हमे प्यार करना ही सिखा गए.
अचानक से छु गयी थी उंगलिया उनके नाजुक लबो से,
और वो लेकर अपने लबो को हमारे लबो में ही समां गए.
काफी देर तक युही कोशिश करता रहा था उन पर मंगल,
तो आखिर में वो बोले की तुम भी अब जवानी में आ गए.....

No comments:

Post a Comment