Sep 8, 2009

प्यार की सहर

हर बार जब भी मै तुमको देखता हूँ,
जाने क्यों तुम में ही खो सा जाता हूँ.
या तो तुम करती हो मुझ पर कोई जादू,
या फिर मै तुम्हारे ख्यालो में ही सो जाता हूँ.
या तो तुम हर वक़्त मेरे ही पास रहो!
या फिर तुम ही मेरे जीवन की अकेली आस रहो.
अगर है ये साँचा प्रेम मेरा तुमसे सच में ,
तब तो इसको मेरे प्यासे दिल की एक प्यास कहो.
कुछ ऐसी हो इश्क की ठंडी हवाएं की दोनों हो जम जाये,
या इसी एक पल में ये सारी काएनात सच में थम जाये.
चाहे कुछ भी करे हमको डराने के लिए दुनिया!
ऐतबार करना की मै तुमसे ही प्रेम करता हूँ.
और जब-जब न मिले तुम मुझसे जान-भूझकर,
तब भी मै तेरे ही इश्क की याद में मरता हूँ..
कभी न कभी तो तेरे प्यार की सहर होगी ही मंगल,
तब ही सही मगर मै तुमको प्यार करकर ही रहूँगा.

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