मै हूँ एक और शायर अदना सा इस जहाँ में,
और ये मेरी शायरी सच में मेरी ही कहानी है.
क्या कुछ बिता है मुझ पर इस जिंदगी में,
वो सब कुछ आपके लिए शब्दों की ज़ुबानी है.
जब कभी दुआ करी थी हमने किसी खुशी के लिए,
खुदा भी हमको सिर्फ गम से ही बहकाते रहे थे.
जिस-जिस को चाह था कभी अपना बनाना यहाँ,
हर उस शख्स को ही अपने दुश्मनो में पाते रहें थे.
मैंने कभी न चाहा था बुरा किसी का अपनी जिंदगी में,
फिर क्यों ये जहाँ आज भी मुझसे रूठा-रूठा सा लगता है?
अगर कोई बातें भी कर ले कभी दो-चार मीठी सी मुझसे,
उसका हर एक लब्ज मुझे जाने क्यों झूठा-झूठा सा लगता है?
अगर चाहते हो कुछ प्यार की बातें करना यहाँ तुम गैरों से,
तो तुमको खुद ही पहले कुछ उनसे प्यार भरा कहना होगा!
इस तरह से जिंदगी नहीं गुजरती है जिंदगी भर यहाँ मंगल,
औरो से खुशी पाने के लिए तुमको भी थोडा सा खुशी से रहना होगा!
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