Sep 8, 2009

प्यासी जवानी

जाने लोग कैसे पहुच जाते है इश्क में उस मुकाम पर,
जब बन जाते है वो एक-दूजे के लिए दिलजानी है.
मेरी और उनकी तो इश्क में बस इतनी सी कहानी है,
हमारी दो-दो सूजी हुई आँखे और उनमे बचा थोडा सा पानी है.
अपना दिया हुआ हर एक गुलाब किताबो में उनकी दम तोड़ चुका,
और उन्हें ये अब याद भी नहीं की ये किस आशिक की निशानी है.
अब तो याद करके गुजरेगी तमाम उम्र अपनी जब कहा था उसने,
अब तो वो भी बन चुकी शायद मेरे प्यार में पूरी की पूरी दीवानी है.
उफ़! यह जहाँ तो लूटता है अक्सर मज़े तमाम इस मोह्हबत में मंगल,
अगर बची है कोई बस प्यार के लिए तो वों शायद तेरी ही प्यासी जवानी है......

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