पिया सावन की बरसात रात में आग लगाती भारी,
जितनी ज्यादा बरसे मेघा उतनी आती याद तुम्हारी.
बहुत बड़ा है दिल पर साजन कोई छोटा ये तूफ़ान नहीं,
तुम कहते हो चुप करके सोजा पर सोना है आसान नहीं.
सो-सो कोस दुरी तक मुझे नींद का नामो-निशान नहीं,
मेरी जान लबो पर आगई है ये मै कहू खाके कसम तुम्हारी..
पिया सावन की बरसात रात में आग लगाती भारी,
जितनी ज्यादा बरसे मेघा उतनी आती याद तुम्हारी.
हम साथ -साथ पर दूर है कितने इस दुनिया दारी में,
मजबूरी के बंधन में बंध रहे तुम समझू बात तुम्हारी मै.
अनहोनी सी कह गयी पिया फँस के किसी लाचारी में,
जान की ग्राहक बनी जवानी रही काम की मार कटारी.
पिया सावन की बरसात रात में आग लगाती भारी,
जितनी ज्यादा बरसे मेघा उतनी आती याद तुम्हारी.
मन का गुलशन खिला नहीं हर फूल पर बड़ी उदासी है,
मरने दे न जीने ही दे मुझको जाने यह कैसी गले में फांसी है.
ले देख अंधेरी रात यह कैसी आज पानी में भी मछली प्यासी है,
मेरे तन की हवस मेरे इस मन को पिया चुट-चुट कर खाती है.
ये सावन की बरसात पिया,
पिया सावन की बरसात रात में आग लगाती भारी,
जितनी ज्यादा बरसे मेघा उतनी आती याद तुम्हारी.
मारेगी न छोडेगी मुझको
इस बार न पूरी होती दिखती मेरे दिल की बात पिया.
मुशकिल बचना दिखता है मेरा आज आज की रात पिया,
जयमंगल सिंह तुमने तो बात मन की खोल सुना दी सारी.
पिया सावन की बरसात रात में आग लगाती भारी,
जितनी ज्यादा बरसे मेघा उतनी आती याद तुम्हारी.
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